14 April ka Panchang : जानिए आज का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय

14 April Ka Panchang : आज, 14 अप्रैल 2024, चैत्र शुक्ल पक्ष की उदया तिथि है और यह षष्ठी तिथि का दिन है। षष्ठी तिथि रविवार दोपहर पहले 11 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। और आज चैत्र नवरात्र का छठा दिन है और रविवार को स्कंद षष्ठी व्रत भी है। रविवार को देर रात 1 बजकर 35 मिनट तक रवि योग रहेगा और देर रात 1 बजकर 35 मिनट तक आर्द्रा नक्षत्र भी रहेगा। यहाँ दिए गए हैं ।

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14 अप्रैल 2024 के शुभ मुहूर्त के विवरण:

  • चैत्र शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि: 14 अप्रैल 2024 को दोपहर पहले 11 बजकर 44 मिनट तक।
  • रवि योग: 14 अप्रैल 2024 को देर रात 1 बजकर 35 मिनट तक।
  • आर्द्रा नक्षत्र: 14 अप्रैल को देर रात 1 बजकर 35 मिनट तक।
  • 14 अप्रैल 2024 का व्रत-त्यौहार: चैत्र नवरात्र का छठा दिन, स्कंद षष्ठी व्रत।
  • यह था आज का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।

14 अप्रैल 2024 पंचांग के पांच अंग

  • तिथि: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, चंद्रमा की दिशा में ‘सूर्य रेखांक’ से 12 अंश ऊपर जाने के लिए लगने वाला समय तिथि कहलाता है। एक माह में तीस तिथियाँ होती हैं, जो दो पक्षों में विभाजित होती हैं – शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। पूर्णिमा तिथि शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि होती है और अमावस्या तिथि कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है।
  • नक्षत्र: आकाश मंडल में एक तारा समूह को नक्षत्र कहा जाता है। इसमें 27 नक्षत्र होते हैं, और इन नक्षत्रों में नौ ग्रहों का स्वामित्व होता है। कुछ प्रमुख नक्षत्रों के नाम हैं – अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशीर्षा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, श्रविष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती।
  • वार: सप्ताह में सात वार होते हैं, जो ग्रहों के नामों से जाने जाते हैं – सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार, रविवार।
  • योग: नक्षत्र की विशेष दूरियों की स्थितियों को योग कहा जाता है। कुल 27 योग होते हैं, जैसे कि विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इंद्र, वैधृति।
  • करण: एक तिथि में दो करण होते हैं, जो एक तिथि के पूर्वार्ध और उत्तरार्ध में होते हैं। कुल 11 करण होते हैं, जैसे कि बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पाद, नाग, किस्तुघ्न।

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