श्री हनुमान चालीसा। Hanuman Chalisa Hindi | हनुमान चालीसा के 5 चमत्कारी लाभ

श्री हनुमान चालीसा। Hanuman Chalisa Hindi | श्री हनुमान चालीसा आबधि भाषा में कवि लेखक गोस्वामी तुलसीदास जी द्वरा लिखी एक काव्यात्मक कृति या रचना है । इस कृति में प्रभु श्री राम भक्त श्री हनुमान जी के कौशल, आलोकीक कार्यों एवं गुणों का वर्णन इस महान श्री हनुमान चालीसा में किया गया है । इस महान कृति में चालीस चौपाई में सुंदर , अद्भुत  , रमणीय श्रीराम भक्त हनुमान जी का वर्णन किया है । हनुमान चालीसा प्रभु श्रीराम भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित वो आलोकीक सुंदर रचना है जो अधिकंश सनातन प्रेमी को कण्ठस्थ याद है । इस लेख में हम आप को श्री हनुमान चालीसा के सभी छंद को और हनुमान चालीसा के 5 चमत्कारी लाभ का वर्णन करेंगे ।

श्री हनुमान चालीसा । Hanuman Chalisa Hindi

श्री हनुमान चालीसा । Hanuman Chalisa Hindi

——— दोहा ———

श्रीगुरु-चरन-सरोज-रज
निज-मन-मुकुर सुधारि ।
बरनउँ रघुबर-बिमल-जस
जो दायक फल चारि ॥
बुद्धि-हीन तनु जानिकै
सुमिरौं पवनकुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं
हरहु कलेस बिकार ॥
——— चौपाई ——–
जय हनुमान ज्ञान-गुन-सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ १ ॥
राम-दूत अतुलित-बल-धामा ।
अंजनिपुत्र – पवनसुत – नामा ॥ २ ॥
महाबीर बिक्रम बजरंगी ।
कुमति-निवार सुमति के संगी ॥ ३ ॥
कंचन-बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ ४ ॥
हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज-जनेऊ साजै॥ ५ ॥
शंकर स्वयं केसरीनंदन ।
तेज प्रताप महा जग-बंदन ॥ ६ ॥
बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम-काज करिबे को आतुर ॥ ७ ॥
प्रभु-चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम-लखन-सीता-मन-बसिया ॥ ८ ॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ ९ ॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचंद्र के काज सँवारे ॥ १० ॥
लाय सँजीवनि लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥ ११ ॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहिं सम भाई ॥ १२ ॥
सहसबदन तुम्हरो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं ॥ १३ ॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥ १४ ॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सकैं कहाँ ते ॥ १५ ॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।
राम मिलाय राज-पद दीन्हा ॥ १६ ॥
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना ।
लंकेश्वर भए सब जग जाना ॥ १७ ॥
जुग सहस्र जोजन पर भानू ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ १८ ॥
प्रभु-मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ १९ ॥
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ २० ॥
राम-दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ २१ ॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रक्षक काहू को डर ना ॥ २२ ॥
आपन तेज सम्हारो आपे ।
तीनौं लोक हाँक ते काँपे ॥ २३ ॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥ २४ ॥
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ २५ ॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥ २६ ॥
सब पर राम राय सिर ताजा।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥ २७ ॥
और मनोरथ जो कोइ लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥ २८ ॥
चारों जुग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत-उजियारा ॥ २९ ॥
साधु संत के तुम रखवारे ।
असुर-निकंदन राम-दुलारे ॥ ३० ॥
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता ।
अस बर दीन्ह जानकी माता ॥ ३१ ॥
राम-रसायन तुम्हरे पासा ।
सादर हो रघुपति के दासा ॥ ३२ ॥
तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥ ३३ ॥
अंत-काल रघुबर-पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरि-भगत कहाई ॥ ३४ ॥
और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्बसुख करई ॥ ३५ ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥ ३६ ॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ ३७ ॥
यह सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहिं बंदि महा सुख होई ॥ ३८ ॥
जो यह पढ़ै हनुमान-चलीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ ३९ ॥
तुलसीदास सदा हरि-चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥ ४० ॥
——— दोहा ———
पवनतनय संकट-हरन,
मंगल-मूरति-रूप ।
राम लखन सीता सहित,
हृदय बसहु सुर-भूप ॥
सियावर रामचंद्र की जय ।
पवनसुत हनुमान की जय ।

हनुमान चालीसा के नियमित पाठ से मिलते हैं ये 5 चमत्कारी लाभ

श्रीराम भक्त हनुमान थोड़ी सी पूजा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। हनुमान जी की पूजा से भय दूर होता है और सुख, शांति, आरोग्य एवं लाभ की प्राप्ति होती है। तुलसीदासजी ने हनुमान जी की महिमा को देखते हुए हनुमान चालीसा की रचना की थी। इस चालीसा का नियमित या मंगलवार और शनिवार को पाठ करने से कई चमत्कारी लाभ मिलते हैं। मंगल, शनि एवं पितृ दोषों से मुक्ति के लिए भी हनुमान चालीसा का पाठ लाभकारी है। हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर भक्तों को हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करना चाहिए।

1. आर्थिक परेशानियों का समाधान

हनुमान चालीसा में हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता कहा गया है। जो भक्त नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, हनुमान जी उनकी हर मनोकामना पूरी करते हैं, चाहे वह धन संबंधी ही क्यों न हो। यदि आपको कभी आर्थिक संकट का सामना करना पड़े तो हनुमान जी का ध्यान कर हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दीजिए। ऐसा करने से आपकी आर्थिक चिंताएं धीरे-धीरे दूर हो जाएंगी। पाठ करते समय पवित्रता का ध्यान रखना आवश्यक है।

2. नकारात्मक शक्तियों से रक्षा

हनुमान जी को अत्यंत निडर एवं बलशाली माना गया है। राम भक्त हनुमान जी बुरी आत्माओं का नाश कर लोगों को उनसे मुक्ति प्रदान करते हैं। हनुमान चालीसा की एक चौपाई है, “भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे।” इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसके आस-पास भूत-पिशाच और दूसरी नकारात्मक शक्तियां नहीं आती हैं। जिन्हें रात में डर लगता है या डरावने सपने आते रहते हैं, उन्हें रोज हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

3. रोगों से मुक्ति

हनुमान जी परम पराक्रमी, महावीर और वलबान हैं, इस का उल्लेख हमें श्री रामचरित मानस और श्री हनुमान चालीसा में मिलता है । श्री हनुमान चालीसा में वर्णित है, “नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरन्तर हनुमत बीरा।।” श्री हनुमान जी के ध्यान से शरीर निरोगी और बलवान बनता है। और साथ ही शारीरिक मानसिक बुद्धि कौसल का विकास भी होता है । साथ ही बता दे की जो लोग अक्सर बीमार रहते हैं या जिनका रोग कई उपचार के बाद भी दूर नहीं होता, उन्हें नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए।

4. बुद्धि एवं चतुरता की प्राप्ति

“विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।।” हनुमान चालीसा की इस चौपाई से स्पष्ट है कि जो भक्ति-भाव से हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, उनमें भी हनुमान जी यह गुण भर देते हैं। छात्रों को हनुमान जी की कृपा पाने के लिए नियमित हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। इससे स्मरण शक्ति बढ़ती है और शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है।

5. साढ़े साती एवं शनि के दुष्प्रभाव से बचाव

एक बार शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि जो भी हनुमान जी की पूजा करेगा, उसे शनिदेव कभी कष्ट नहीं देंगे। इसलिए शनि की साढ़ेसाती या ढैया के बुरे प्रभाव से बचने के लिए हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ लाभदायक है।
हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इसलिए, हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए इस पवित्र चालीसा का पाठ अवश्य करें।

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