Padmini Ekadashi Vrata :- अनेकों पुण्यप्रदाता त्रैवार्षिक पद्मिनी एकादशी आज

Padmini Ekadashi Vrata :- हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर छब्बीस हो जाती है। मलमास जिसे अधिक मास या पुरूषोत्तम मास कहा गया है , इस मास में पद्मिनी और परमा दो एकादशी आती है जिसमें अत्यंत पुण्यदायिनी पद्मिनी एकादशी भी एक है। इसे कमला एकादशी भी कहा जाता है , यह एकादशी तीन साल में एक बार आती है क्योंकि मलमास हर तीन साल पर लगता है।

उदया तिथि के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानि 29 जुलाई दिन शनिवार को पद्ममिनी एकादशी का व्रत रखा जायेगा। इस साल पद्मिनी एकादशी पर दो बड़े ही शुभ योग बन रहे हैं. इस दिन ब्रह्म और इंद्र योग रहेंगे। अधिक मास में आने वाली एकादशी का महत्व बहुत ज्यादा होता है , क्योंकि इस माह के स्वामी श्रीहरि विष्णु हैं और एकादशी तिथि भी इन्हें ही समर्पित है। ऐसे में पद्मिनी एकादशी का व्रत रखकर पूजा करने से दोगुना फल की प्राप्ति होती है। इस व्रत से साल भर की एकादशियों का पुण्य मिल जाता है।पद्मिनी एकादशी जगत के पालनहार भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति पद्मिनी एकादशी व्रत का पालन सच्चे मन से करता है उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है।

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इस व्रत को करने से व्यक्ति हर प्रकार की तप-तपस्या , यज्ञ और व्रत आदि से मिलने वाले फल के समान फल प्राप्त करता है। Padmini Ekadashi Vrata गौ दान के समान फल देता है। शास्त्रों में गौ दान करने वालों को मृत्यु के बाद यमलोक की पीड़ा सहनी नहीं पड़ती। साथ ही घर में सुख , समृद्धि , शांति और खुशहाली आती है। पद्मिनी एकादशी पर व्रत कथा के पाठ से साधक को सुख-समृद्धि और संतान की प्राप्ति होती है। किसी भी व्यक्ति की कोई विशेष मनोकामना पूर्ण ना हो पा रही हो तो उसे पद्मिनी एकादशी का व्रत करना चाहिये। पुराणों में हर एकादशी व्रत की कथा का वर्णन है , पद्मिनी एकादशी व्रत के दिन कथा का श्रवण किये बिना ये व्रत अधूरा माना जाता है। एकादशी व्रत का आनंद मार्ग द्वारा दी गई दिशा निर्देश ही उपयुक्त महत्व रखता है। आनंद मार्ग में एकादशी का महत्व वैज्ञानिक आधार पर माना गया है। वैज्ञानिक आधार के साथ साथ परमात्मा के साथ सन्धि सम्बन्ध भी एक आधार है। एकादशी व्रत करने से शरीर और मन को शक्ति मिलता है। एकादशी व्रत निर्जला और सजला किया जा सकता है , इसमेँ निर्जला एकादशी ही उत्तम होता है। ना की फलाहार से। फलाहार एकादशी व्रत करने से नाम मात्र के सिवा और कुछ नहीं होता।

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